पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
संदर्भ
- भारत और ब्राज़ील ने दूरसंचार तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICTs) के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को और बेहतर करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत–ब्राज़ील संबंधों का संक्षिप्त विवरण
- राजनयिक संबंध: भारत और ब्राज़ील के बीच वर्ष 1948 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए तथा वर्ष 2006 से दोनों देश रणनीतिक साझेदार हैं।
- दोनों देशों के बीच क्षेत्रवार सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए कई संयुक्त कार्य समूह भी गठित किए गए हैं।
- व्यापार संबंध: ब्राज़ील वर्तमान में दक्षिण अमेरिका में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
- वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 12.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का रहा, जिसमें भारत का निर्यात 6.77 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।
- दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार में आने वाली बाधाओं की निगरानी एवं पहचान करने तथा उनके समाधान के लिए उचित उपाय करने हेतु एक संस्थागत तंत्र के रूप में व्यापार निगरानी तंत्र स्थापित किया है।
- रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग: भारत और ब्राज़ील ने वर्ष 2003 में रक्षा सहयोग के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। रक्षा सहयोग के लिए संस्थागत तंत्र के रूप में संयुक्त रक्षा समिति (JDC) की बैठकें आयोजित की जाती हैं।
- सुरक्षा सहयोग: वर्ष 2006 में रणनीतिक संवाद तंत्र स्थापित किया गया, जिसके अंतर्गत दोनों देशों की साझा चिंता से जुड़े क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की जाती है।
- दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि, आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता संधि तथा दोषसिद्ध व्यक्तियों के स्थानांतरण संबंधी समझौता भी लागू है।
- अंतरिक्ष सहयोग: दोनों देशों ने वर्ष 2004 में बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए एक रूपरेखा समझौते तथा अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच अंतर-संस्थागत सहयोग के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
- दोनों देश भारतीय उपग्रहों से संबंधित डेटा साझाकरण एवं उपग्रह ट्रैकिंग के क्षेत्र में भी सहयोग कर रहे हैं।
- बहुआयामी संबंध: भारत और ब्राज़ील के बीच द्विपक्षीय स्तर के साथ-साथ BRICS, BASIC, G20, G4, भारत–ब्राज़ील–दक्षिण अफ्रीका (IBSA) संवाद मंच, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन जैसे बहुपक्षीय एवं बहुपक्षीय-समूहों के मंचों पर भी घनिष्ठ और बहुआयामी संबंध हैं। इसके अतिरिक्त दोनों देश संयुक्त राष्ट्र (UN), विश्व व्यापार संगठन (WTO), यूनेस्को (UNESCO) तथा विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) जैसे व्यापक बहुपक्षीय संस्थानों में भी सहयोग करते हैं।
परिवर्तित वैश्विक व्यवस्था में भारत–ब्राज़ील सहयोग की प्रासंगिकता
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार: भारत और ब्राज़ील सुरक्षा परिषद की स्थायी एवं गैर-स्थायी, दोनों श्रेणियों में विस्तार का समर्थन करते हैं। यह वैश्विक दक्षिण तथा अन्य कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करता है।
- वैश्विक दक्षिण की आवाज़: दोनों देश संयुक्त राष्ट्र, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) तथा विश्व बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार का समर्थन करते हैं, ताकि वे समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं तथा विकासशील देशों की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित कर सकें।
- जैव-ऊर्जा एवं वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन: भारत और ब्राज़ील वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन के संस्थापक सदस्य हैं तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर अपनाए जा सकने वाले जैव ईंधन विकल्पों को बढ़ावा देते हैं।
- TFFF (ट्रॉपिकल फॉरेस्ट्स फॉरएवर फंड) एवं COP30: भारत COP30 में ब्राज़ील के जलवायु नेतृत्व का समर्थन करता है तथा वन संरक्षण और जलवायु वित्तपोषण पर बल देता है।
- द्विपक्षीय निवेश एवं व्यापार तंत्र: बदलती वैश्विक व्यापार गतिशीलता के अनुरूप व्यापारिक बाधाओं को दूर करना, वीज़ा प्रक्रियाओं को सरल बनाना तथा स्थानीय मुद्राओं में वित्तपोषण को प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है।
- औषधि एवं स्वास्थ्य सुरक्षा: टीकों तथा उष्णकटिबंधीय रोगों के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान एवं विकास (R&D) वैश्विक दक्षिण में स्वास्थ्य संबंधी आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने में योगदान दे सकता है।
- खाद्य सुरक्षा: भारत और ब्राज़ील दोनों महत्वपूर्ण खाद्य उत्पादक देश हैं। दोनों देश भूख एवं गरीबी के विरुद्ध वैश्विक गठबंधन जैसी बहुपक्षीय पहलों के माध्यम से वर्ष 2030 तक भुखमरी समाप्त करने की दिशा में संयुक्त प्रयासों का समर्थन करते हैं। यह खाद्य सुरक्षा के संबंध में वैश्विक नेतृत्व की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
- संयुक्त STI नवाचार: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम प्रौद्योगिकी तथा नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास तकनीकी आत्मनिर्भरता तथा समावेशी नवाचार को बढ़ावा दे सकता है।
संबंधों में चुनौतियाँ
- भूराजनीतिक प्रतिस्पर्धा: भारत और ब्राज़ील दोनों उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएँ हैं तथा वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका और प्रभाव को बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।
- कभी-कभी यह स्थिति प्रतिस्पर्धा को जन्म दे सकती है, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में, जहाँ दोनों देश अपनी भागीदारी एवं प्रभाव बढ़ाने का प्रयास करते हैं।
- व्यापार बाधाएँ: भारत और ब्राज़ील के बीच व्यापार की व्यापक संभावनाएँ हैं, लेकिन दोनों देशों में वर्तमान विभिन्न व्यापारिक बाधाओं तथा संरक्षणवादी उपायों के कारण इन संभावनाओं का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाया है।
- इस प्रकार के प्रतिबंध द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश के विकास में बाधा उत्पन्न करते हैं।
- बुनियादी ढाँचा एवं संपर्क: दोनों देशों के बीच बुनियादी ढाँचे और संपर्क-सुविधाओं के विकास की अभी पर्याप्त संभावनाएँ हैं।
- व्यापार तथा जन-से-जन संपर्क को बढ़ावा देने के लिए बेहतर हवाई एवं समुद्री संपर्क तथा पारगमन संपर्क-सुविधाओं की आवश्यकता है।
- क्षेत्रीय प्राथमिकताएँ एवं सामरिक स्वायत्तता: ब्राज़ील की प्राथमिकताओं में लैटिन अमेरिका का एकीकरण तथा पश्चिमी गोलार्ध में गठबंधनों को सुदृढ़ करना शामिल है।
- क्षेत्रीय सामरिक उद्देश्यों में कुछ असंगतियाँ हैं, क्योंकि भारत का प्रमुख ध्यान अपने निकटवर्ती पड़ोस तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर केंद्रित है।
- भूराजनीतिक दबाव एवं बाहरी प्रभाव: ब्राज़ील का यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों के साथ घनिष्ठ संबंध है, जबकि भारत की रणनीतिक अभिविन्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर केंद्रित है। इसके परिणामस्वरूप दोनों देशों की विभिन्न वैश्विक रणनीतिक साझेदारियाँ अलग-अलग रूप लेती हैं।
- दोनों देशों को बड़े वैश्विक समूहों के साथ अपने संबंधों में संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता महसूस होती है, जिसका प्रभाव द्विपक्षीय प्राथमिकताओं पर भी पड़ता है।
आगे की राह
- भारत–ब्राज़ील संबंधों में व्यापक अप्रयुक्त संभावनाएँ विद्यमान हैं, लेकिन व्यापार एवं संपर्क से लेकर सामरिक मतभेदों तक वर्तमान चुनौतियों का समाधान निरंतर संवाद, संस्थागत तंत्र तथा राजनीतिक इच्छाशक्ति के माध्यम से किया जाना आवश्यक है।
- अधिक गहन सहभागिता, समझौतों के प्रभावी अनुपालन एवं अनुवर्ती कार्रवाई तथा जन-से-जन संपर्क में वृद्धि से बदलती वैश्विक व्यवस्था में इस दक्षिण–दक्षिण साझेदारी की पूर्ण संभावनाओं को साकार करने में सहायता मिलेगी।
स्रोत: PIB
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